बेंगलुरु: कर्नाटक पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) द्वारा दाखिल नई चार्जशीट में पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े अश्लील वीडियो लीक मामले में बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। जांच के अनुसार, यह पूरा मामला आपसी विवाद, राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और बदले की भावना से जुड़ा था, जिसे 2024 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अंजाम दिया गया।
चार्जशीट के मुताबिक, प्रज्वल रेवन्ना के पूर्व ड्राइवर कार्तिक एन (33) ने नजदीकी का फायदा उठाकर उनके मोबाइल का पिन याद कर लिया था। एक मौके पर अकेले मिलने पर उसने फोन से निजी वीडियो अपने मोबाइल में ट्रांसफर कर लिए और बाद में उन्हें हार्ड ड्राइव में सुरक्षित रखा। अपनी गतिविधि छिपाने के लिए उसने अगस्त 2021 में झूठी शिकायत दर्ज कराई कि उसका फोन खो गया है।
एसआईटी ने 13,712 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट हासन की अदालत में दाखिल की है, जिसमें 39 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच के दौरान 277 गवाहों के बयान लिए गए और डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच भी की गई। चूंकि प्रज्वल रेवन्ना पहले ही एक मामले में दोषी ठहराए जा चुके हैं, इसलिए इस चार्जशीट में उनका नाम शामिल नहीं किया गया है।
जांच में सामने आया कि 2022 में जमीन को लेकर कार्तिक और रेवन्ना परिवार के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद कार्तिक को नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद उसने बदले की भावना से प्रज्वल के राजनीतिक विरोधियों से हाथ मिला लिया।
आरोप है कि कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर वीडियो लीक करने की योजना बनाई गई। जनवरी 2024 में एक स्थानीय नेता ने सार्वजनिक रूप से वीडियो उजागर करने की धमकी भी दी थी। वहीं, अप्रैल 2024 में सोशल मीडिया पर “टीजर कैंपेन” चलाकर वीडियो लीक की चर्चा फैलाने की कोशिश की गई।
20 अप्रैल 2024 को आरोपियों ने करीब 70 पेन ड्राइव खरीदे और उनमें वीडियो कॉपी कर विभिन्न जगहों पर बांटे। पहचान छिपाने के लिए इन्हें विरोधी समूहों और सार्वजनिक स्थानों पर रखा गया। कुछ मामलों में लोगों को निजी तौर पर वीडियो दिखाने के भी आरोप हैं।
चार्जशीट में यह भी बताया गया कि इस पूरी साजिश के लिए धन का लेन-देन हुआ और सबूत मिटाने की कोशिशें भी की गईं, जैसे मोबाइल फोन तोड़ना और पेन ड्राइव नष्ट करने का प्रयास।
एसआईटी की जांच से स्पष्ट होता है कि वीडियो लीक एक सुनियोजित और बहुस्तरीय साजिश का हिस्सा था, जिसमें कई लोग शामिल थे।





