महाराष्ट्र में भारत बंद: नए श्रम कानूनों के खिलाफ सड़कों पर उतरे श्रमिक संगठन

महाराष्ट्र में भारत बंद के दौरान सैकड़ों श्रमिक सड़कों पर उतरे और केंद्र सरकार द्वारा लागू चार नए श्रम संहिताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। मुंबई सहित कई इलाकों में विभिन्न ट्रेड यूनियनों के कार्यकर्ताओं ने रैलियां निकालकर अपनी मांगें उठाईं।

सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (CITU) और अन्य संगठनों से जुड़े श्रमिकों ने आरोप लगाया कि नए श्रम कानूनों में असंगठित और गिग वर्कर्स के लिए स्पष्ट सामाजिक सुरक्षा प्रावधान नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नई व्यवस्थाओं से वर्षों में अर्जित श्रमिक अधिकार कमजोर हो जाएंगे।

“हायर एंड फायर” नीति का आरोप

CITU मुंबई के महासचिव शैलेन्द्र चौहान ने कहा कि नए श्रम कानून ट्रेड यूनियनों को कमजोर करने की दिशा में बनाए गए हैं। उनके अनुसार, कानूनी हड़ताल करना कठिन बना दिया गया है और अवैध घोषित होने पर जेल का प्रावधान है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भविष्य निधि (PF) में योगदान कम किया जा सकता है और काम के घंटे बढ़ाकर 12 घंटे प्रतिदिन तक किए जा सकते हैं।

प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने कहा कि इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड के तहत 300 तक कर्मचारियों वाली कंपनियों को बिना सरकारी अनुमति छंटनी की छूट मिल सकती है, जिससे नौकरी की सुरक्षा प्रभावित होगी। साथ ही, हड़ताल के लिए कड़े नोटिस नियम लागू किए गए हैं।

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22 संगठनों का संयुक्त विरोध

इस विरोध प्रदर्शन में कम से कम 22 श्रमिक संगठनों ने भाग लिया। संयुक्त कार्रवाई समिति के नेतृत्व में विभिन्न यूनियनों ने केंद्र की नीतियों को श्रमिक और किसान विरोधी बताया। मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित महाराष्ट्र कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड के सामने भी प्रदर्शन किया गया।

राजनीतिक समर्थन

महाराष्ट्र कांग्रेस ने भारत बंद को समर्थन दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने पार्टी पदाधिकारियों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। शिवसेना के एमएलसी सचिन अहिर भी प्रदर्शन में शामिल हुए और श्रम संहिताओं को “हायर एंड फायर नीति” करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार बिना व्यापक चर्चा के इन कानूनों को लागू कर रही है।

प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारी संगठनों ने निर्माण श्रमिकों के शोषण पर रोक लगाने, 65 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए पेंशन शुरू करने, नियमित स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था करने और श्रमिकों के खातों में प्रतिमाह ₹2000 देने की मांग की। साथ ही, एमएमआरडीए, मेट्रो, रेलवे और अन्य सरकारी परियोजनाओं में स्थानीय श्रमिकों को काम देने की भी मांग उठाई गई।

भारत बंद के दौरान मुंबई के कई बैंक और दफ्तरों में कामकाज प्रभावित रहा। श्रमिक संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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