नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने की मांग एक बार फिर सामने आई है। भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने इस विषय पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कहा कि नाम परिवर्तन से देश की प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत से राजधानी का संबंध मजबूत होगा।
चांदनी चौक से लोकसभा सांसद खंडेलवाल ने कहा कि महाभारत में वर्णित इंद्रप्रस्थ यमुना नदी के किनारे बसा एक भव्य नगर था, जिसकी भौगोलिक स्थिति वर्तमान दिल्ली से मेल खाती है। पिछले चार महीनों में यह दूसरी बार है जब उन्होंने इस प्रस्ताव को उठाया है।
पत्र में उन्होंने तर्क दिया कि ‘दिल्ली’ नाम शहर की मूल और प्राचीन पहचान को पूरी तरह नहीं दर्शाता। उनके अनुसार, राजधानी का इतिहास अत्यंत समृद्ध और बहुस्तरीय है, जो भारतीय सभ्यता की गहरी जड़ों को प्रतिबिंबित करता है। खंडेलवाल ने यह भी कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा पुराना किला क्षेत्र में किए गए उत्खनन में ऐसे संकेत मिले हैं, जो प्राचीन इंद्रप्रस्थ के अस्तित्व की ओर इशारा करते हैं।
इतिहासकारों और परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, इंद्रप्रस्थ महाभारत काल में पांडवों की राजधानी थी और इसे खांडवप्रस्थ के वन क्षेत्र पर बसाया गया था। ASI की खुदाई में लगभग 1000 ईसा पूर्व के बसावट स्तरों के प्रमाण मिलने की भी चर्चा की जाती है।
मध्यकाल में तोमर वंश के शासन के दौरान शहर को ‘ढिल्लिका’ कहा जाता था, जो बाद में दिल्ली सल्तनत और मुगल काल में ‘देहली’ बना और धीरे-धीरे ‘दिल्ली’ नाम प्रचलित हो गया।
खंडेलवाल का कहना है कि राजधानी का नाम इंद्रप्रस्थ करना एक ऐतिहासिक कदम होगा, जो देश की सभ्यतागत पहचान को पुनर्स्थापित करने के साथ-साथ भारत की प्राचीन विरासत को वैश्विक स्तर पर उजागर करेगा।





