2047 तक भारत बनेगा शीर्ष तीन एआई महाशक्तियों में शामिल: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत को 2047 तक दुनिया की शीर्ष तीन एआई महाशक्तियों में शामिल होने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने यह बात नई दिल्ली में आयोजित पांच दिवसीय ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के दौरान एक साक्षात्कार में कही। यह वैश्विक स्तर का पहला बड़ा एआई सम्मेलन है, जिसकी मेजबानी ग्लोबल साउथ में भारत कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मानव केंद्रित, समावेशी और विकासोन्मुखी होनी चाहिए। उन्होंने भारतीय दर्शन “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक का उद्देश्य मानवता की सेवा करना है, उसका स्थान लेना नहीं।

एआई मानव इतिहास का अहम मोड़

प्रधानमंत्री के अनुसार, एआई मानव सभ्यता के लिए एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। यह मानव क्षमता को अभूतपूर्व रूप से बढ़ा सकती है, लेकिन बिना उचित दिशा-निर्देश के सामाजिक ढांचे को चुनौती भी दे सकती है। उन्होंने कहा कि भारत तकनीकी प्रगति के साथ-साथ समान और न्यायसंगत परिणाम सुनिश्चित करना चाहता है।

सम्मेलन की थीम ‘पीपल, प्लेनेट और प्रोग्रेस’ पर आधारित है, जिसका उद्देश्य एआई के लाभों को सभी तक पहुंचाना है, न कि केवल विकसित देशों या शुरुआती उपयोगकर्ताओं तक सीमित रखना।

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विकसित भारत 2047 और एआई

प्रधानमंत्री ने एआई को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि यह तकनीक विकास की चुनौतियों का समाधान करने और नई आर्थिक संभावनाएं पैदा करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तपेदिक, डायबिटिक रेटिनोपैथी और मिर्गी की शुरुआती पहचान के लिए एआई आधारित समाधान उपयोग में लाए जा रहे हैं। भारतीय भाषाओं में एआई आधारित व्यक्तिगत शिक्षण प्लेटफॉर्म ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के छात्रों की मदद कर रहे हैं।

इसके अलावा, अमूल द्वारा लाखों महिला दुग्ध उत्पादकों को पशु स्वास्थ्य संबंधी सलाह देने, फसल परामर्श और मौसम विश्लेषण में एआई के उपयोग तथा प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण जैसे प्रयासों का भी उल्लेख किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां दुनिया एआई से असमानता बढ़ने की आशंका जता रही है, वहीं भारत इसका उपयोग अंतर घटाने के लिए कर रहा है।

एआई में पक्षपात और समावेशन

प्रधानमंत्री ने एआई में संभावित पक्षपात पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि डेटा विविध और संतुलित न हो तो तकनीक लैंगिक, भाषाई या सामाजिक असमानताओं को बढ़ा सकती है। भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को देखते हुए क्षेत्रीय भाषाओं में एआई विकास और संतुलित डेटा सेट तैयार करना आवश्यक है।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई

प्रधानमंत्री ने कहा कि आधार और यूपीआई जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुभव के आधार पर भारत एआई को समावेशी विकास का साधन बना सकता है। एआई का उपयोग कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, धोखाधड़ी रोकने और शासन में पारदर्शिता बढ़ाने में किया जा सकता है।

एआई क्रांति में भारत की भूमिका

उन्होंने कहा कि भारत केवल एआई का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बनना चाहता है। इंडिया एआई मिशन, डेटा सेंटर विस्तार, उच्च क्षमता कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर निर्माण और कौशल विकास कार्यक्रम इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

प्रधानमंत्री ने आईटी क्षेत्र को लेकर कहा कि एआई इसे समाप्त नहीं करेगा, बल्कि नया रूप देगा। आने वाले वर्षों में भारतीय आईटी कंपनियां वैश्विक बाजार के लिए एआई उत्पाद और प्लेटफॉर्म विकसित करने में अग्रणी बन सकती हैं।

सुरक्षा और वैश्विक नियम

एआई के दुरुपयोग की आशंकाओं पर उन्होंने मानव निगरानी, पारदर्शिता और सुरक्षा-आधारित डिजाइन पर आधारित वैश्विक मानकों की आवश्यकता बताई। डीपफेक, अपराध और आतंकवादी गतिविधियों में एआई के उपयोग पर सख्त रोक लगाने की बात भी कही।

युवाओं के लिए अवसर

रोजगार को लेकर युवाओं की चिंताओं पर प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक काम खत्म नहीं करती, बल्कि काम का स्वरूप बदलती है। कौशल विकास और पुनः कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से युवा भविष्य की नई नौकरियों के लिए तैयार हो सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने विजन को दोहराते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के तहत एआई में भी भारत को आत्मनिर्भर और अग्रणी बनना होगा। उनका लक्ष्य है कि 2047 तक भारत न केवल एआई का उपयोग करे, बल्कि उसके निर्माण और नवाचार में भी दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो।

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