नई दिल्ली: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने एआई इम्पैक्ट समिट में भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए “MANAV” विजन पेश करते हुए मानव-केंद्रित विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई मानव इतिहास में एक बड़ा परिवर्तन साबित हो रहा है और इसका प्रभाव अभी शुरुआती चरण में ही है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि “MANAV” शब्द पांच प्रमुख सिद्धांतों का प्रतिनिधित्व करता है— नैतिक और आचार आधारित प्रणाली, जवाबदेह शासन, डेटा अधिकारों सहित राष्ट्रीय संप्रभुता, सुलभ और समावेशी तकनीक तथा वैध और विश्वसनीय प्रणालियां। उनके अनुसार, इन सिद्धांतों के जरिए एआई का उपयोग मानव हितों को प्राथमिकता देते हुए किया जाना चाहिए।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने एआई की तुलना वायरलेस संचार के आविष्कार से करते हुए कहा कि जिस तरह वायरलेस तकनीक ने दुनिया को वास्तविक समय में जोड़ दिया, उसी तरह एआई भी मानव क्षमताओं को कई गुना बढ़ाने वाला बदलाव ला रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार तकनीकी परिवर्तन की गति और दायरा पहले से कहीं अधिक तेज और व्यापक है।
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प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि एआई केवल मशीनों को स्मार्ट बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसानों की कार्यक्षमता और रचनात्मकता को भी बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है जहां इंसान और बुद्धिमान प्रणालियां मिलकर काम करेंगी, नवाचार करेंगी और साथ-साथ विकसित होंगी।
समिट के दौरान पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव Antonio Guterres और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक Kristalina Georgieva सहित कई वैश्विक नेताओं का Bharat Mandapam में स्वागत भी किया।
16 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस पांच दिवसीय एआई इम्पैक्ट समिट में 500 से अधिक वैश्विक एआई विशेषज्ञ, 150 शिक्षाविद व शोधकर्ता तथा 400 से ज्यादा टेक्नोलॉजी अधिकारियों और परोपकारी संगठनों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।





