उत्तर प्रदेश सरकार ने बेंगलुरु स्थित AI स्टार्टअप Puch AI के साथ किए गए करीब ₹25,000 करोड़ के बड़े समझौते (MoU) को रद्द कर दिया है। यह निर्णय कंपनी की वित्तीय क्षमता और विश्वसनीयता पर संदेह सामने आने के बाद लिया गया।
समझौता क्यों हुआ रद्द?
यह MoU हाल ही में Uttar Pradesh सरकार और स्टार्टअप के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए किया गया था। लेकिन बाद में जब अधिकारियों ने कंपनी की पृष्ठभूमि और निवेश क्षमता की जांच की, तो कई जरूरी पहलुओं पर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।
सूत्रों के अनुसार, कंपनी से वित्तीय दस्तावेज और निवेश से जुड़े प्रमाण मांगे गए थे, लेकिन वे संतोषजनक तरीके से प्रस्तुत नहीं किए गए। इसी कारण सरकार ने समझौते को आगे बढ़ाना उचित नहीं समझा।
सरकार का रुख
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने स्पष्ट किया कि राज्य में होने वाले बड़े निवेश समझौतों के लिए सख्त जांच प्रक्रिया अपनाई जाती है। उनका कहना है कि केवल घोषणा के आधार पर परियोजनाओं को मंजूरी नहीं दी जा सकती, बल्कि उनकी व्यवहारिकता और निवेश क्षमता भी देखना जरूरी है।
सरकार ने यह भी कहा कि MoU एक प्रारंभिक सहमति होती है, जिसे अंतिम रूप देने से पहले पूरी तरह से जांचा जाता है।
क्या थी परियोजना?
इस समझौते के तहत राज्य में कई बड़े AI प्रोजेक्ट प्रस्तावित थे, जैसे:
- AI आधारित डेटा सेंटर
- AI पार्क की स्थापना
- “AI Commons” प्लेटफॉर्म
- AI यूनिवर्सिटी की योजना
इन परियोजनाओं का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को तकनीक और इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ाना था।
विवाद कैसे बढ़ा?
जब इस बड़े निवेश की घोषणा हुई, तो कई लोगों ने सवाल उठाए कि एक अपेक्षाकृत नई स्टार्टअप इतनी बड़ी परियोजना को कैसे संभाल पाएगी। सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर कंपनी की क्षमता को लेकर चर्चा तेज हो गई।
इन सवालों के बाद सरकार ने मामले की समीक्षा शुरू की और अंततः MoU को रद्द करने का फैसला लिया।
आगे की रणनीति
सरकार अब भविष्य में ऐसे सभी बड़े निवेश समझौतों के लिए और अधिक सख्त जांच प्रक्रिया अपनाने पर जोर दे रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कंपनियों की वित्तीय स्थिति, अनुभव और विश्वसनीयता की गहराई से जांच की जाए।
निष्कर्ष
₹25,000 करोड़ का यह समझौता रद्द होना यह दिखाता है कि बड़े निवेश के दावे से ज्यादा महत्वपूर्ण उसकी विश्वसनीयता और क्षमता होती है। उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम पारदर्शिता और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देने की दिशा में एक संकेत माना जा रहा है।





